Chandi di Vaar in Hindi

चंडी दी वार ॥
ੴ वाहिगुरू जी की फतह ॥
स्री भगउती जी सहाइ ॥
वार स्री भगउती जी की ॥
पातिसाही १० ॥
पउड़ी ॥
पृथम भगौती सिमरि कै गुर नानक लईं धिआइ ॥
फिर अंगद गुर ते अमरदासु रामदासै होईं सहाइ ॥
अरजन हरिगोबिंद नो सिमरौ स्री हरिराइ ॥
स्री हरिकृशन धिआईऐ जिसु डिठे सभि दुखि जाइ ॥
तेग बहादर सिमरिऐ घरि नउ निधि आवै धाइ ॥
सभ थाईं होइ सहाइ ॥१॥
खंडा पृथमै साज कै जिन सभ सैसारु उपाइआ ॥
ब्रहमा बिसनु महेस साजि कुदरति दा खेलु रचाइ बणाइआ ॥
सिंधु परबत मेदनी बिनु थंम्हा गगनि रहाइआ ॥
सिरजे दानो देवते तिन अंदरि बादु रचाइआ ॥
तै ही दुरगा साजि कै दैता दा नासु कराइआ ॥
तैथों ही बलु राम लै नाल बाणा दहसिरु घाइआ ॥
तैथों ही बलु कृसन लै कंसु केसी पकड़ि गिराइआ ॥
बडे बडे मुनि देवते कई जुग तिनी तनु ताइआ ॥
किनी तेरा अंतु न पाइआ ॥२॥
साधू सतजुगु बीतिआ अध सीली त्रेता आइआ ॥
नच्ची कल सरोसरी कल नारद डउरू वाइआ ॥
अभिमानु उतारन देवतिआँ महिखासुर सुँभ उपाइआ ॥
जीति लए तिनि देवते तिह लोकी राजु कमाइआ ॥
वड्डा बीर अखाइ कै सिर उपर छत्र फिराइआ ॥
दित्ता इंदु्र निकाल कै तिन गिरि कैलासु तकाइआ ॥
डरि कै हत्थो दानवी दिल अंदरि त्रासु वधाइआ ॥
पास दुरगा दे इंदु्र आइआ ॥३॥
इक दिहाड़े नावण आई दुरगसाह ॥
इंद्र बिरथा सुणाई अपणे हाल दी ॥
छीन लई ठकुराई साते दानवी ॥
लोकी तिही फिराई दोही आपणी ॥
बैठे वाइ वधाई ते अमरावती ॥
दित्ते देव भजाई सभना राकसाँ ॥
किनै न जित्ता जाई मह्हखे दैत नूँ ॥
तेरी साम तकाई देवी दुरगसाह ॥४॥
दुरगा बैण सुणंदी हस्सी हड़हड़ाइ ॥
ओही सीहु मंगाइआ राखस भक्खणा ॥
चिंता करहु न काई देवा नूँ आखिआ ॥
रोह होई महा माई राकसि मारणे ॥५॥
दोहरा ॥
राकसि आए रोहले खेति भिड़न के चाइ ॥
लशकनि तेगाँ बरछीआँ सूरजु नदरि न पाइ ॥६॥
पउड़ी ॥
दुहाँ कंधारा मुहि जुड़े ढोल संख नगारे बजे ॥
राकसि आए रोहले तरवारी बखतर सज्जे ॥
जु्ुटे सउहे जु्ुध नंु इक जात न जाणन भज्जे ॥
खेत अंदरि जोधे गज्जे ॥७॥
जंग मुसाफा बज्जिआ रणि घुरे नगारे चावले ॥
झूलण नेजे बैरका नीसाण लसनि लसावले ॥
ढोल नगारे पउण दे ऊंघन जाणु जटावले ॥
दुरगा दानो डहे रण नाद वज्जन खेतु भीहावले ॥
बीर परोते बरछीइंे जण डाल चमु्ुटे आवले ॥
इक वड्ढे तेगी तड़फीअन मद पीते लोटनि बावले ॥
इक चुण चुण झाड़उ कढीअन रेत विचो सुइना डावले ॥
गदा तृसूलाँ बरछीआँ तीर वग्गन खरे उतावले ॥
जण डसे भुजंगम सावले॥ मर जावनि बीर रुहावले ॥८॥
देखण चंड प्रचंड नंू रण घुरे नगारे ॥
धाए राकसि रोहले चउगिरदे भारे ॥
हथीं तेगाँ पकड़ि कै रण भिड़े करारे ॥
कदे न नट्ठै जु्ुध ते जोधे जुझारे ॥
दिल विच रोह बढाइ कै मारि मारि पुकारे ॥
मारे चंड प्रचंड नै बीर खेत उतारे ॥
मारे जापन बिजुली सिरभारि मुनारे ॥९॥
चोट पई दमामे दलाँ मुकाबला ॥
देवी दसत नचाई सीहण सारदी ॥
पेटि मलंदे लाई महखे दैत नंू ॥
गुरदे आँदा खाई नाले रुकड़े ॥
जेही दिल विच आई कही सुणाइ कै ॥
चोटी जाण दिखाई तारे धूमकेत ॥१०॥
चोटाँ पवन नगारे अणीआँ जट्टीआँ ॥
धूह लईआँ तरवारी देवाँ दानवी ॥
वाहन वारो वारी सूरे संघरे ॥
वगै रत्तु झुलारी जिउ गेरू बाबत्रा ॥
देखन बैठ अटारी नारी राकसाँ ॥
पाई धूम सवारी दुरगा दानवी ॥११॥
लक्ख नगारे वज्जन आम्हो साम्हणे ॥
राकस रणो न भज्जन रोहे रोहले ॥
सीहाँ वाँगू गज्जण सब्भे सूरमे ॥
तणि तणि कैबर छड्डन दुरगा सामणे ॥१२॥
घुरे नगारे दोहरे रण संगलीआले ॥
धूड़ि लपेटे धूहरे सिरदार जटाले ॥
उखलीआँ नासा जिना मुहि जापन आले ॥
धाए देवी साहमणे बीर मु्ुछलीआले ॥
सुरपत जेहे लड़ हटे बीर टले न टाले ॥
गज्जे दुरगा घेरि कै जणु घणीअरु काले ॥१३॥
चोट पई खरचामी दलाँ मुकाबला ॥
घेर लई वरिआमी दुरगा आइ कै ॥
राखस वडे अलामी भज्ज न जाणदे ॥
अंत होए सुरगामी मारे देवता ॥१४॥
अगणत घुरे नगारे दलाँ भिड़ंदिआँ ॥
पाए महखल भारे देवा दानवाँ ॥
वाहन फट्ट करारे राकसि रोहले ॥
जापण तेगी आरे मिआनो धूहीआँ ॥
जोधे वडे मुनारे जापन खेत विचि ॥
देवी आप सवारे पब जवेहणे ॥
कदे न आखन हारे धावन साहमणे ॥
दुरगा सभ संघारे राखसि खड़ग लै ॥१५॥
उमल लत्थे जोधे मारू बज्जिआ ॥
बद्दल जिउ महिखासुर रण विचि गज्जिआ ॥
इंद्र जेहा जोधा मैथउ भज्जिआ ॥
कउण विचारी दुरगा जिन रणु सजिआ ॥१६॥
वज्जे ढोल नगारे दलाँ मुकाबला ॥
तीर फिरै रैबारे आम्हो साम्हणे ॥
अगणत बीर संघारे लगदी कैबरी ॥
डिग्गे जाणि मुनारे मारै बिज्जु दे ॥
खुल्ली वाली दैत अहाड़े सभे सूरमे ॥
सु्ुते जाणि जटारे भंगा खाइ कै ॥१७॥
दुहाँ कंधाराँ मुहि जुड़े नालि धउसा भारी ॥
कड़क उट्ठिआ फउज ते वडा अहंकारी ॥
लै कै चलिआ सूरमे नालि वडे हजारी ॥
मिआनो खंडा धूहिआ महिखासुर भारी ॥
उम्मल लत्थे सूरमे मार मची करारी ॥
जापे चल्ले रत्त दे सलले जटधारी ॥१८॥
सट्ट पई जमधाणी दलाँ मुकाबला ॥
धूहि लई कृपाणी दुरगा मिआन ते ॥
चंडी राकसि खाणी वाही दैत नूँ ॥
कोपर चूर चवाणी लत्थी करग लै ॥
पाखर तुरा पलाणी रड़की धरत जाइ ॥
लैदी अघा सिधाणी सिंगाँ धउल दिआँ ॥
कूरम सिर लहिलाणी दुसमन मारि कै ॥
वड्ढे गन तिखाणी मूए खेत विच ॥
रण विच घत्ती घाणी लोहू मिझ दी ॥
चारे जुग कहाणी चल्लग तेग दी ॥
बिधण खेत विहाणी महखे दैत नूँ ॥१९॥
इती महखासुर दैत मारे दुरगा आइआ ॥
चउदह लोकाँ राणी सिंघु नचाइआ ॥
मारे बीर जटाणी दल विचि अगले ॥
मंगन नाही पाणी दली हंकार कै ॥
जण करी समाइ पठाणी सुणि कै रागु नूँ ॥
रत्तू दे हड़वाणी चले बीर खेत ॥
पीता फुल्ल इआणी घुमन सूरमे ॥२०॥
होई अलोप भवानी देवाँ नूँ राजु दे ॥
ईसर दी बरदानी होई जित्तु दिन ॥
सुँभ निसुँभ गुमानी जनमे सूरमे ॥
इंद्र दी रजधानी तक्की जित्तणी ॥२१॥
इंद्रपुरी ते धावणा वड जोधी मता पकाइआ ॥
संज पटेला पाखरा भेड़ संदा साजु बणाइआ ॥
जंमे कटक अछूहणी असमानु गरदी छाइआ ॥
रोह सुँभ निसुँभ सिधाइआ ॥२२॥
सुँभ निसुँभ अलाइआ वड जोधी संघरु वाए ॥
रोह दिखाली दित्तीआ वरिआमी तुरे नचाए ॥
घुरे दमामे दोहरे जम बाहण जिउ अरड़ाए ॥
देउ दानो लुज्झण आए ॥२३॥
दानो देउ अनागी संघरु रचिआ ॥
फु्ुल खिड़े जण बागीं बाणे जोधिआँ ॥
भूताँ इल्लाँ कागीं गोसत भखिआ ॥
हुँमड़ धुँमड़ जागी घत्ती सूरिआँ ॥२४॥
सट्ट पई नगारे दलाँ मुकाबला ॥
दिते देउ भजाई मिलि कै राकसीं ॥
लोकी तिही फिराई दोही आपणी ॥
दुरगा दी साम तकाई देवाँ डरदिआँ ॥
आँदी चंडि चड़ाई उते राकसाँ ॥२५॥
आई फेर भवानी खबरी पाईआँ ॥
दैत वडे अभिमानी होए एकठे ॥
लोचन धूम गुमानी राइ बुलाइआ ॥
जग विच वडा दानो आप कहाइआ ॥
सट्ट पई खरचामी दुरगा लिआवणी ॥२६॥
कड़क उठी रण चंडी फउजाँ देख कै ॥
धूहि मिआनो खंडा होई साहमणे ॥
सभे बीर संघारे धूमरनैण दे ॥
जण लै कटे आरे दरखत बाढीआँ ॥२७॥
चोबीं धउंस बजाई दलाँ मुकाबला ॥
रोह भवानी आई उते राकसाँ ॥
खब्बै दसत नचाई सीहण सार दी ॥
बहुतिआँ दे तन लाई कीती रंगुली ॥
भाईआँ मारन भाई दुरगा जाणि कै ॥
रोह होइ चलाई राकसि राइ नंू ॥
जम पुर दीआ पठाई लोचन धूम नंू ॥
जापे दित्ती साई मारण सुँभ दी ॥२८॥
भंने दैत पुकारे राजे सुँभ थै ॥
लोचनधूम संघारे सणे सिपाहीआँ ॥
चुणि चुणि जोधे मारे अंदर खेत दै ॥
जापन अंबरि तारे डिग्गनि सूरमे ॥
गिरे परबत भारे मारे बिज्जु दै ॥
दैताँ दे दल हारे दहसत खाइ कै ॥
बचे सु मारे मारे रहदे राइ थै ॥२९॥
रोह होइ बुलाए राकसि राइ ने ॥
बैठे मता पकाए दुरगा लिआवणी ॥
चंड अर मुँड पठाए बहुता कटकु दै ॥
जापे छप्पर छाए बणीआ केजमा ॥
जेते राइ बुलाइ चल्ले जुद्ध नो ॥
जण जम पुर पकड़ चलाए सभे मारने ॥३०॥
ढोल नगारे वाए दलाँ मुकाबला ॥
रोह रुहेले आए उते राकसाँ ॥
सभनी तुरे नचाए बरछे पकड़ि कै ॥
बहुते मार गिराए अंदरि खेत दै ॥
तीरी छहबर लाई बु्ुठी देवता ॥३१॥
भेरी संख वजाए संघरि रच्चिआ ॥
तणि तणि तीर चलाए दुरगा धनख लै ॥
जिनी दसत उठाए रहे न जीवदे ॥
चंड अर मुँड खपाए दोनो देवता ॥३२॥
सुँभ निसुँभ रिसाए मारे दैत सुण ॥
जोधे सभ बुलाए आपणे मजलसी ॥
जिनी देउ भजाए इंद्र जेवहे ॥
तेई मार गिराए पल विच देवता ॥
ओनी दसती दसत वजाए तिना चित करि ॥
फिर स्रणवत बीज चलाए बीड़े राइ दे ॥
संज पटोला पाए चिलकत टोपीआँ ॥
लुझण्ण नो अरड़ाए राकस रोहले ॥
कदे न किने हटाए जु्ुध मचाइ कै ॥
मिल तेई दानो आए हुण संघरि देखणा ॥३३॥
दैती डंड उभारी नेड़ै आइ कै ॥
सिंघ करी असवारी दुरगा सोर सुण ॥
खब्बे दसत उभारी गदा फिराइ कै ॥
सैना सभ संघारी स्रणवत बीज दी ॥
जण मद खाइ मदारी घूमन सूरमे ॥
अगणत पाउ पसारी रुले अहाड़ विचि ॥
जापे खेड खिडारी सुत्ते फाग नंू ॥३४॥
स्रणवत बीज हकारे रहिंदे सूरमे ॥
जोधे जेड मुनारे दिस्सण खेत विचि ॥
सभनी दसत उभारे तेगाँ धूहि कै ॥
मारो मार पुकारे आए साहमणे ॥
संजाते ठणिकारे तेगीं उब्भरे ॥
घाड़ घड़नि ठठिआरे जाणि बणाइ कै ॥३५॥
सट्ट पई जमधाणी दलाँ मुकाबला ॥
घूमर बरग सताणी दल विचि घत्तिओ ॥
सणे तुरा पलाणी डिग्गण सूरमे ॥
उठि उठि मंगणि पाणी घाइल घूमदे ॥
एवडु मारि विहाणी उपर राकसाँ ॥
बिज्जल जिउ झरलाणी उट्ठी देवता ॥३६॥
चोबी धउस उभारी दलाँ मुकाबला ॥
सभो सैना मारी पल विचि दानवी ॥
दुरगा दानो मारे रोह बढाइ कै ॥
सिर विच तेग वगाई स्रणवत बीज दे ॥३७॥
अगणत दानो भारे होए लोहूआ ॥
जोधे जेड मुनारे अंदरि खेत दै ॥
दुरगा नो ललकारे आए साहमणे ॥
दुरगा सभ संघारे राकस आँवदे ॥
रतू दे परनाले तिन ते भुइ पए ॥
उट्ठे कारणिआरे राकस हड़हड़ाइ ॥३८॥
धगा संगलीआली संघर वाइआ ॥
बरछी बुँबलीआली सूरे संघरे ॥
भेड़ि मचिआ बीराली दुरगा दानवीं ॥
मार मची मुहराली अंदरि खेत दै ॥
जण नट लत्थे छाली ढोलि बजाइ कै ॥
लोहू फाथी जाली लोथी जमधड़ी ॥
घण विचि जिउ छंछाली तेगाँ हस्सीआँ ॥
घुँमरिआर सिआली बणीआँ केजमाँ ॥३९॥
धगा सूली बजाईआँ दलाँ मुकाबला ॥
धूहि मिआनो लईआँ जुआनी सूरमी ॥
स्रणवत बीज बधाईआँ अगणत सूरताँ ॥
दुरगा सउहें आईआँ रोह बढाइ कै ॥
सभनी आण वगाईआँ तेगाँ धूहि कै ॥
दुरगा सभ बचाईआँ ढाल संभाल कै ॥
देवी आप चलाईआँ तकि तकि दानवी ॥
लोहू नालि डुबाईआँ तेगाँ नंगीआँ ॥
सारसुती जनु नाईआँ मिल कै देवीआँ ॥
सभे मार गिराईआँ अंदरि खेत दै ॥
तिद्दूँ फेरि सवाईआँ होईआँ सूरताँ ॥४०॥
सूरी संघरि रचिआ ढोल संख नगारे वाइ कै ॥
चंड चितारी कालका मनि बाहला रोस बढाइ कै ॥
निकली मत्था फोड़ि कै जन फते नीसाण बजाइ कै ॥
जाग सु जंमी जुध नो जरवाणा जणु मरड़ाइ कै ॥
दल विचि घेरा घत्तिआ जण सींह तुरिआ गणिणाइ कै ॥
आप विसूला होइआ तिहु लोकाँ ते खुनसाइ कै ॥
रोह सिधाइआँ चक्र पान कर निंदा खड़ग उठाइ कै ॥
अगै राकस बैठे रोहले तीरी तेगी छहबर लाइ कै ॥
पकड़ पछाड़े राकसाँ दल दैताँ अंदरि जाइ कै ॥
बहु केसी पकड़ि पछाड़िअनि तिन अंदरि धूम रचाइ कै ॥
बडे बडे चुण सूरमे गहि कोटी दए चलाइ कै ॥
रण काली गुस्सा खाइ कै ॥४१॥
दुहा कंधारा मुिह जुड़े अणीआरा चोईआँ ॥
धूहि किरपाणाँ तिक्खीआ नाल लोहू धोईआँ ॥
हूराँ स्रणवत बीज नंू घति घेिर खलोईआँ ॥
लाड़ा वेखणि लाड़ीआँ चउगिरदै होईआँ ॥४२॥
चोबी धउसी पाईआँ दलाँ मुकाबला ॥
दसती धूह नचाईआँ तेगाँ तिखीआँ ॥
सूरिआँ दे तन लाईआँ गोशत गिद्धीआँ ॥
बिद्धण राती आईआँ मरदाँ घोड़िआँ ॥
जोगणीआँ मिलि धाईआँ लोहू भक्खणा ॥
फउजाँ मारि हटाईअथ देवाँ दानवाँ ॥
भजदी कथा सुणाईआँ राजे सुँभ थै ॥
भुईं न पउणै पाईआँ बूँदा रकत दीआँ ॥
काली खेत खपाईआँ सभै सूरताँ ॥
बहुती सिरी विहाईआँ घड़ीआँ काल कीआ ॥
जाणि न जाए माईआँ जूझे सूरमे ॥४३॥
सुँभ सुणी करहाली स्रणवत बीज दी ॥
रण विचि किनै न झाली दुरगा आँवदी ॥
बहुते बीर जटाली उठे आखि कै ॥
चोटा पान तबाली जासन जुद्ध नंू ॥
थरि थरि पृथमी चाली दलाँ चड़ंदिआँ ॥
नाउ जिवे है हाली सहु दरीआउ विचि ॥
धूड़ि उताहाँ घाली छड़ी तुरंगमाँ ॥
जाणि पुकारू चाली धरती इंद्र थै ॥४४॥
आहरि मिलिआ आहरीआँ सैण सूरिआँ साजी ॥
चल्ले सउहे दुरगसाह जण काबै हाजी ॥
तीरी तेगी जमधड़ी रणि वंडी भाजी ॥
इक घाइल घुमनि सूरमे जणु मकतब काजी ॥
इक बीर परोते बरछीए जिउ झुक पउन निवाजी ॥
इक दुरगा सउहे खुनस कै खुणसाइन ताजी ॥
इक धावन दुरगा साम्हणे जिउ भुखिआए पाजी ॥
कदे न रज्जे जुझ ते रजि होए राजी ॥४५॥
बज्जे संगलीआले संघर डोहरे ॥
डहे जु खेत जटाले हाठाँ जोड़ि कै ॥
नेजे बंबलीआले दिस्सन ओरड़े ॥
चल्ले जाण जटाले नावण गंग नूँ ॥४६॥
दुरगा अतै दानवी सूल होईआँ कंगा ॥
वाछड़ घत्ती सूरिआँ विच खेत खतंगाँ ॥
धूहि कृपाणा तिक्खीआँ बढ लाहनि अंगाँ ॥
पहला दलाँ मिलंदिआँ भेड़ु पाइआ निहंगाँ ॥४७॥
ओरड़ फउजाँ आईआँ बीर चड़े कंधारी ॥
सड़क मिआनो कढीआँ तिक्खीआ तरवारी ॥
कड़क उठे रण मच्चिआ वड्डे हंकारी ॥
सिर धड़ बाहाँ गन ले फुल जेहै बाड़ी ॥
जापे कटे बाढीआँ रुख चंदनि आरी ॥४८॥
दुहा कंधारा मुहि जुड़े जा सट्ट पई खरवार कउ ॥
तक तक कैबरि दुरगसाह तक मारे भले जुझार कउ ॥
पैदल मारे हाथीआँ संगि रथ गिरे असवार कउ ॥
सोहन संजा बागड़ा जणु लग्गे फु्ुल अनार कउ ॥
गु्ुसे आई कालका हथि सज्जे लै तलवार कउ ॥
एदू पारउ ओत पार हरनाकसि कई हजार कउ ॥
जिण इक्का रही कंधार कउ ॥
सद रहमत तेरे वार कउ ॥४९॥
दुहा कंधारा मुहि जुड़े सट्ट पई जमधाण कउ ॥
तद खिंग नसुँभ नचाइआ डालि उपरि बरगसताण कउ ॥
फड़ी बिलंद मंगाइउसु फरमाइस करि मुलतान कउ ॥
गु्ुसे आई साहमणे रण अंदरि घत्तण घाण कउ ॥
अगै तेग वगाई दुरगसाह बढ सुँभन बही पलाण कउ ॥
रड़की जाइ कै धरत कउ बड्ढ पाखर बड्ढ किकाण कउ ॥
बीर पलाणो डिग्गिआ करि सिजदा सुँभ सुजाण कउ ॥
साबास सलोणे खान कउ ॥
सद साबास तेरे ताण कउ ॥
तारीफाँ पान चबान कउ ॥
सद रहमत कैफाँ खाण कउ ॥
सद रहमत तुरे नचाण कउ ॥५०॥
दुरगा अतै दानवी गह संघरि कत्थे ॥
ओरड़ उट्ठे सूरमे आ डाहे मत्थे ॥
कट्ट तुफंगी कैबरी दल गाहि निक्कथे ॥
देखणि जंग फरेशते असमानो लत्थे ॥५१॥
दुहा कंधाराँ मुह जुड़े दल घुरे नगारे ॥
ओरड़ आए सूरमे सिरदार अणिआरे ॥
लै के तेगाँ बरछीआँ हथिआर उभारे ॥
टोप पटेला पाखराँ गलि संज सवारे ॥
लै के बरछी दुरगसाह बहु दानव मारे ॥
चड़े रथी गज घोड़िई मार भुइ ते डारे ॥
जाण हलवाई सीख नाल विंन्ह वड़े उतारे ॥५२॥
दुहाँ कंधाराँ मुहि जुड़े नाल धउसा भारी ॥
लई भगउती दुरगसाह वर जागन भारी ॥
लाई राजे सुँभ नो रतु पीऐ पिआरी ॥
सुँभ पलाणो डिग्गिआ उपमा बीचारी ॥
डुब रतु नालहु निकली बरछी दुधारी ॥
जाण रजादी उतरी पैन सूही सारी ॥५३॥
दुरगा अतै दानवी भेड़ पइआ सबाहीं ॥
ससत्र पजूते दुरगसाह गह सभनीं बाहीं ॥
सुँभ निसुँभ संघारिआ वथ जे है साहीं ॥
फउजाँ राकसिआरीआँ वेख रोवनि धाहीं ॥
मुहि कड़ूचे घाह दे छड्ड घोड़े राहीं ॥
भजदे होइ मारीअन मुड़ झाकन नाहीं ॥५४॥
सुँभ निसुँभ पठाइआ जम दे धाम नो ॥
इंद्र सद्द बुलाइआ राज अभिशेखनो ॥
सिर पर छत्र फिराइआ राजे इंद्र दै ॥
चउदह लोकाँ छाइआ जसु जगमात दा ॥
दुरगा पाठ बणाइआ सभे पउड़ीआँ ॥
फेर न जूनी आइआ जिन इह गाइआ ॥५५॥
इति स्री दुरगा की वार समापतं सतु सुभम सतु ॥