Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

Chandi Di Vaar - चंडी दी वार

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

Chandi Di Vaar in Hindi – चंडी दी वार – Chandi Di Vaar Lyrics – Read Online

Chandi Di Vaar in Punjabi

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

चंडी दी वार ॥
ੴ वाहगुरू जी की फतह ॥
स्री भगउती जी सहाय ॥
वार स्री भगउती जी की ॥पातिसाही १० ॥पउड़ी ॥
प्रिथम भगौती सिमरि कै गुर नानक लईं ध्याइ ॥
फिर अंगद गुर ते अमरदासु रामदासै होईं सहाय ॥
अरजन हरिगोबिन्द नो सिमरौ स्री हरिराय ॥
स्री हरिकृष्ण ध्याईऐ जिसु डिठे सभि दुखि जाय ॥
तेग बहादर सिमरिऐ घरि नउ निधि आवै धाय ॥
सभ थाईं होइ सहाय ॥१॥

खंडा प्रिथमै साज कै जिन सभ सैसारु उपायआ ॥
ब्रहमा बिसनु महेस साजि कुदरति दा खेलु रचाय बणायआ ॥
सिंधु परबत मेदनी बिनु थंम्हा गगनि रहायआ ॥
सिरजे दानो देवते तिन अन्दरि बादु रचायआ ॥
तै ही दुरगा साजि कै दैता दा नासु करायआ ॥
तैथों ही बलु राम लै नाल बाना दहसिरु घायआ ॥
तैथों ही बलु क्रिसन लै कंसु केसी पकड़ि गिरायआ ॥
बडे बडे मुनि देवते कई जुग तिनी तनु तायआ ॥
किनी तेरा अंतु न पायआ ॥२॥

साधू सतजुगु बीत्या अध सीली त्रेता आया ॥
नच्ची कल सरोसरी कल नारद डउरू वायआ ॥
अभिमानु उतारन देवत्यां महखासुर सुंभ उपायआ ॥
जीति लए तिनि देवते तेह लोकी राजु कमायआ ॥
वड्डा बीर अखाय कै सिर उपर छत्र फिरायआ ॥
दित्ता इन्दु्र निकाल कै तिन गिरि कैलासु तकायआ ॥
ड्रि कै हत्थो दानवी दिल अन्दरि त्रासु वधायआ ॥
पास दुरगा दे इन्दु्र आया ॥३॥

इक देहाड़े नावन आई दुरगसाह ॥
इन्द्र बिरथा सुणायी अपने हाल दी ॥
छीन लई ठकुरायी साते दानवी ॥
लोकी तेही फिरायी दोही आपनी ॥
बैठे वाय वधायी ते अमरावती ॥
दित्ते देव भजायी सभना राकसां ॥
किनै न जित्ता जायी मह्हखे दैत नूं ॥
तेरी साम तकायी देवी दुरगसाह ॥४॥

दुरगा बैन सुणन्दी हस्सी हड़हड़ाय ॥
ओही सीहु मंगायआ राखस भक्खना ॥
चिंता करहु न कायी देवा नूं आख्या ॥
रोह होयी महा मायी राकसि मारने ॥५॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

दोहरा ॥
राकसि आए रोहले खेति भिड़न के चाय ॥
लशकनि तेगां बरछियां सूरजु नदरि न पाय ॥६॥

पउड़ी ॥
दुहां कंधारा मुह जुड़े ढोल संख नगारे बजे ॥
राकसि आए रोहले तरवारी बखतर सज्जे ॥
जु्ुटे सउहे जु्ुध नुं इक जात न जानन भज्जे ॥
खेत अन्दरि जोधे गज्जे ॥७॥

जंग मुसाफा बज्ज्या रनि घुरे नगारे चावले ॥
झूलन नेजे बैरका नीसान लसनि लसावले ॥
ढोल नगारे पउन दे ऊंघन जानु जटावले ॥
दुरगा दानो डहे रण नाद वज्जन खेतु भीहावले ॥
बीर परोते बरछीइें जण डाल चमु्ुटे आवले ॥
इक वढ्ढे तेगी तड़फियन मद पीते लोटनि बावले ॥
इक चुन चुन झाड़उ कढियन रेत विचो सुइना डावले ॥
गदा त्रिसूलां बरछियां तीर वग्गन खरे उतावले ॥
जण डसे भुजंगम सावले ॥
मर जावनि बीर रुहावले ॥८॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

देखन चंड प्रचंड नूं रण घुरे नगारे ॥
धाए राकसि रोहले चउगिरदे भारे ॥
हथीं तेगां पकड़ि कै रण भिड़े करारे ॥
कदे न नट्ठै जु्ुध ते जोधे जुझारे ॥
दिल विच रोह बढाय कै मारि मारि पुकारे ॥
मारे चंड प्रचंड नै बीर खेत उतारे ॥
मारे जापन बिजुली सिरभारि मुनारे ॥९॥

चोट पई दमामे दलां मुकाबला ॥
देवी दसत नचायी सीहन सारदी ॥
पेटि मलन्दे लायी महखे दैत नूं ॥
गुरदे आंदा खायी नाले रुकड़े ॥
जेही दिल विच आई कही सुणाय कै ॥
चोटी जान दिखायी तारे धूमकेत ॥१०॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

चोटां पवन नगारे अणियां जट्टियां ॥
धूह लईआं तरवारी देवां दानवी ॥
वाहन वारो वारी सूरे संघरे ॥
वगै रत्तु झुलारी ज्यु गेरू बाबत्रा ॥
देखन बैठ अटारी नारी राकसां ॥
पायी धूम सवारी दुरगा दानवी ॥११॥

लक्ख नगारे वज्जन आम्हो साम्हने ॥
राकस रनो न भज्जन रोहे रोहले ॥
सीहां वांगू गज्जन सभ्भे सूरमे ॥
तनि तनि कैबर छड्डन दुरगा सामने ॥१२॥

घुरे नगारे दोहरे रण संगलियाले ॥
धूड़ि लपेटे धूहरे सिरदार जटाले ॥
उखलियां नासा जिना मुह जापन आले ॥
धाए देवी साहमने बीर मु्ुछलियाले ॥
सुरपत जेहे लड़ हटे बीर टले न टाले ॥
गज्जे दुरगा घेरि कै जनु घणियरु काले ॥१३॥

चोट पई खरचामी दलां मुकाबला ॥
घेर लई वर्यामी दुरगा आइ कै ॥
राखस वडे अलामी भज्ज न जाणदे ॥
अंत होए सुरगामी मारे देवता ॥१४॥

अगनत घुरे नगारे दलां भिड़न्द्यां ॥
पाए महखल भारे देवा दानवां ॥
वाहन फट्ट करारे राकसि रोहले ॥
जापन तेगी आरे म्यानो धूहियां ॥
जोधे वडे मुनारे जापन खेत विचि ॥
देवी आप सवारे पब जवेहने ॥
कदे न आखन हारे धावन साहमने ॥
दुरगा सभ संघारे राखसि खड़ग लै ॥१५॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

उमल लत्थे जोधे मारू बज्ज्या ॥
बद्दल ज्यु महखासुर रण विचि गज्ज्या ॥
इन्द्र जेहा जोधा मैथउ भज्ज्या ॥
कउन विचारी दुरगा जिन रनु सज्या ॥१६॥

वज्जे ढोल नगारे दलां मुकाबला ॥
तीर फिरै रैबारे आम्हो साम्हने ॥
अगनत बीर संघारे लगदी कैबरी ॥
डिग्गे जानि मुनारे मारै बिज्जु दे ॥
खुल्ली वाली दैत अहाड़े सभे सूरमे ॥
सु्ुते जानि जटारे भंगा खाय कै ॥१७॥

दुहां कंधारां मुह जुड़े नालि धउसा भारी ॥
कड़क उट्ठ्या फउज ते वडा अहंकारी ॥
लै कै चल्या सूरमे नालि वडे हजारी ॥
म्यानो खंडा धूहआ महखासुर भारी ॥
उम्मल लत्थे सूरमे मार मची करारी ॥
जापे चल्ले रत्त दे सलले जटधारी ॥१८॥

स्ट्ट पई जमधानी दलां मुकाबला ॥
धूह लई क्रिपानी दुरगा म्यान ते ॥
चंडी राकसि खानी वाही दैत नूं ॥
कोपर चूर चवानी लत्थी करग लै ॥
पाखर तुरा पलानी रड़की धरत जाय ॥
लैदी अघा सिधानी सिंगां धउल द्यां ॥
कूरम सिर लहलानी दुसमन मारि कै ॥
वढ्ढे गन तिखानी मूए खेत विच ॥
रण विच घत्ती घानी लोहू मिझ दी ॥
चारे जुग कहानी चल्लग तेग दी ॥
बिधन खेत वेहानी महखे दैत नूं ॥१९॥

इती महखासुर दैत मारे दुरगा आया ॥
चउदह लोकां रानी सिंघु नचायआ ॥
मारे बीर जटानी दल विचि अगले ॥
मंगन नाही पानी दली हंकार कै ॥
जण करी समाय पठानी सुनि कै रागु नूं ॥
रत्तू दे हड़वानी चले बीर खेत ॥
पीता फुल्ल यानी घुमन सूरमे ॥२०॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

होयी अलोप भवानी देवां नूं राजु दे ॥
ईसर दी बरदानी होयी जित्तु दिन ॥
सुंभ निसुंभ गुमानी जनमे सूरमे ॥
इन्द्र दी रजधानी तक्की जित्तनी ॥२१॥

इन्द्रपुरी ते धावना वड जोधी मता पकायआ ॥
संज पटेला पाखरा भेड़ सन्दा साजु बणायआ ॥
जंमे कटक अछूहनी असमानु गरदी छायआ ॥
रोह सुंभ निसुंभ सिधायआ ॥२२॥

सुंभ निसुंभ अलायआ वड जोधी संघरु वाए ॥
रोह दिखाली दित्तिया वर्यामी तुरे नचाए ॥
घुरे दमामे दोहरे जम बाहन ज्यु अरड़ाए ॥
देउ दानो लुझ्झन आए ॥२३॥

दानो देउ अनागी संघरु रच्या ॥
फु्ुल खिड़े जण बागीं बाने जोध्यां ॥
भूतां इल्लां कागीं गोसत भख्या ॥
हुंमड़ धुंमड़ जागी घत्ती सूर्यां ॥२४॥

स्ट्ट पई नगारे दलां मुकाबला ॥
दिते देउ भजायी मिलि कै राकसीं ॥
लोकी तेही फिरायी दोही आपनी ॥
दुरगा दी साम तकायी देवां ड्रद्यां ॥
आंदी चंडि चड़ायी उते राकसां ॥२५॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

आई फेर भवानी खबरी पाईआं ॥
दैत वडे अभिमानी होए एकठे ॥
लोचन धूम गुमानी राय बुलायआ ॥
जग विच वडा दानो आप कहायआ ॥
स्ट्ट पई खरचामी दुरगा ल्यावनी ॥२६॥

कड़क उठी रण चंडी फउजां देख कै ॥
धूह म्यानो खंडा होयी साहमने ॥
सभे बीर संघारे धूमरनैन दे ॥
जण लै कटे आरे दरखत बाढियां ॥२७॥

चोबीं धउंस बजायी दलां मुकाबला ॥
रोह भवानी आई उते राकसां ॥
खब्बै दसत नचायी सीहन सार दी ॥
बहुत्यां दे तन लायी कीती रंगुली ॥
भाईआं मारन भायी दुरगा जानि कै ॥
रोह होइ चलायी राकसि राय नूं ॥
जम पुर दिया पठायी लोचन धूम नूं ॥
जापे दित्ती सायी मारन सुंभ दी ॥२८॥

भन्ने दैत पुकारे राजे सुंभ थै ॥
लोचनधूम संघारे सने सिपाहियां ॥
चुनि चुनि जोधे मारे अन्दर खेत दै ॥
जापन अम्बरि तारे डिग्गनि सूरमे ॥
गिरे परबत भारे मारे बिज्जु दै ॥
दैतां दे दल हारे दहसत खाय कै ॥
बचे सु मारे मारे रहदे राय थै ॥२९॥

रोह होइ बुलाए राकसि राय ने ॥ बैठे मता पकाए दुरगा ल्यावनी ॥
चंड अर मुंड पठाए बहुता कटकु दै ॥ जापे छप्पर छाए बणिया केजमा ॥
जेते राय बुलाय चल्ले जुद्ध नो ॥ जण जम पुर पकड़ चलाए सभे मारने ॥३०॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

ढोल नगारे वाए दलां मुकाबला ॥
रोह रुहेले आए उते राकसां ॥
सभनी तुरे नचाए बरछे पकड़ि कै ॥
बहुते मार गिराए अन्दरि खेत दै ॥
तीरी छहबर लायी बु्ुठी देवता ॥३१॥

भेरी संख वजाए संघरि रच्च्या ॥
तनि तनि तीर चलाए दुरगा धनख लै ॥
जिनी दसत उठाए रहे न जीवदे ॥
चंड अर मुंड खपाए दोनो देवता ॥३२॥

सुंभ निसुंभ रिसाए मारे दैत सुन ॥
जोधे सभ बुलाए आपने मजलसी ॥
जिनी देउ भजाए इन्द्र जेवहे ॥
तेयी मार गिराए पल विच देवता ॥
ओनी दसती दसत वजाए तिना चित करि ॥
फिर स्रणवत बीज चलाए बीड़े राय दे ॥
संज पटोला पाए चिलकत टोपियां ॥
लुझण्न नो अरड़ाए राकस रोहले ॥
कदे न किने हटाए जु्ुध मचाय कै ॥
मिल तेयी दानो आए हुन संघरि देखना ॥३३॥

दैती डंड उभारी नेड़ै आइ कै ॥ सिंघ करी असवारी दुरगा सोर सुन ॥
खब्बे दसत उभारी गदा फिराय कै ॥ सैना सभ संघारी स्रणवत बीज दी ॥
जण मद खाय मदारी घूमन सूरमे ॥ अगनत पाउ पसारी रुले अहाड़ विचि ॥
जापे खेड खिडारी सुत्ते फाग नूं ॥३४॥

स्रणवत बीज हकारे रहन्दे सूरमे ॥ जोधे जेड मुनारे दिस्सन खेत विचि ॥
सभनी दसत उभारे तेगां धूह कै ॥ मारो मार पुकारे आए साहमने ॥
संजाते ठणिकारे तेगीं उभ्भरे ॥ घाड़ घड़नि ठठ्यारे जानि बणाय कै ॥३५॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

स्ट्ट पई जमधानी दलां मुकाबला ॥ घूमर बरग सतानी दल विचि घत्त्यो ॥
सने तुरा पलानी डिग्गन सूरमे ॥ उठि उठि मंगनि पानी घायल घूमदे ॥
एवडु मारि वेहानी उपर राकसां ॥ बिज्जल ज्यु झरलानी उट्ठी देवता ॥३६॥

चोबी धउस उभारी दलां मुकाबला ॥ सभो सैना मारी पल विचि दानवी ॥
दुरगा दानो मारे रोह बढाय कै ॥ सिर विच तेग वगायी स्रणवत बीज दे ॥३७॥

अगनत दानो भारे होए लोहूआ ॥ जोधे जेड मुनारे अन्दरि खेत दै ॥
दुरगा नो ललकारे आए साहमने ॥ दुरगा सभ संघारे राकस आंवदे ॥
रतू दे परनाले तिन ते भुइ पए ॥ उट्ठे कारण्यारे राकस हड़हड़ाय ॥३८॥

धगा संगलियाली संघर वायआ ॥ बरछी बुम्बलियाली सूरे संघरे ॥
भेड़ि मच्या बीराली दुरगा दानवीं ॥ मार मची मुहराली अन्दरि खेत दै ॥
जण नट लत्थे छाली ढोलि बजाय कै ॥ लोहू फाथी जाली लोथी जमधड़ी ॥
घण विचि ज्यु छंछाली तेगां हस्सियां ॥ घुंमर्यार स्याली बणियां केजमां ॥३९॥

धगा सूली बजाईआं दलां मुकाबला ॥
धूह म्यानो लईआं जुआनी सूरमी ॥
स्रणवत बीज बधाईआं अगनत सूरतां ॥
दुरगा सउहें आईआं रोह बढाय कै ॥
सभनी आण वगाईआं तेगां धूह कै ॥
दुरगा सभ बचाईआं ढाल संभाल कै ॥
देवी आप चलाईआं तकि तकि दानवी ॥
लोहू नालि डुबाईआं तेगां नंगियां ॥
सारसुती जनु नाईआं मिल कै देवियां ॥
सभे मार गिराईआं अन्दरि खेत दै ॥
तिद्दूं फेरि सवाईआं होईआं सूरतां ॥४०॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

सूरी संघरि रच्या ढोल संख नगारे वाय कै ॥
चंड चितारी कालका मनि बाहला रोस बढाय कै ॥
निकली मत्था फोड़ि कै जन फते नीसान बजाय कै ॥
जाग सु जंमी जुध नो जरवाना जनु मरड़ाय कै ॥
दल विचि घेरा घत्त्या जण सींह तुर्या गणिणाय कै ॥
आप विसूला होया तेहु लोकां ते खुनसाय कै ॥
रोह सिधायआं चक्र पान कर निन्दा खड़ग उठाय कै ॥
अगै राकस बैठे रोहले तीरी तेगी छहबर लाय कै ॥
पकड़ पछाड़े राकसां दल दैतां अन्दरि जाय कै ॥
बहु केसी पकड़ि पछाड़िअनि तिन अन्दरि धूम रचाय कै ॥
बडे बडे चुन सूरमे गह कोटी दए चलाय कै ॥
रण काली गुस्सा खाय कै ॥४१॥

दुहा कंधारा मुेह जुड़े अणियारा चोईआं ॥
धूह किरपाणां तिक्खिया नाल लोहू धोईआं ॥
हूरां स्रणवत बीज नूं घति घेिर खलोईआं ॥
लाड़ा वेखनि लाड़ियां चउगिरदै होईआं ॥४२॥

चोबी धउसी पाईआं दलां मुकाबला ॥
दसती धूह नचाईआं तेगां तिखियां ॥
सूर्यां दे तन लाईआं गोशत गिद्धियां ॥
बिद्धन राती आईआं मरदां घोड़्यां ॥
जोगणियां मिलि धाईआं लोहू भक्खना ॥
फउजां मारि हटाईअथ देवां दानवां ॥
भजदी कथा सुणाईआं राजे सुंभ थै ॥
भुईं न पउनै पाईआं बून्दा रकत दियां ॥
काली खेत खपाईआं सभै सूरतां ॥
बहुती सिरी वेहाईआं घड़ियां काल किया ॥
जानि न जाए माईआं जूझे सूरमे ॥४३॥

सुंभ सुनी करहाली स्रणवत बीज दी ॥
रण विचि किनै न झाली दुरगा आंवदी ॥
बहुते बीर जटाली उठे आखि कै ॥
चोटा पान तबाली जासन जुद्ध नूं ॥
थरि थरि प्रिथमी चाली दलां चड़न्द्यां ॥
नाउ जिवे है हाली सहु दरियाउ विचि ॥
धूड़ि उताहां घाली छड़ी तुरंगमां ॥
जानि पुकारू चाली धरती इन्द्र थै ॥४४॥

आहरि मिल्या आहरियां सैन सूर्यां साजी ॥
चल्ले सउहे दुरगसाह जण काबै हाजी ॥
तीरी तेगी जमधड़ी रनि वंडी भाजी ॥
इक घायल घुमनि सूरमे जनु मकतब काजी ॥
इक बीर परोते बरछीए ज्यु झुक पउन निवाजी ॥
इक दुरगा सउहे खुनस कै खुणसायन ताजी ॥
इक धावन दुरगा साम्हने ज्यु भुख्याए पाजी ॥
कदे न रज्जे जुझ ते रजि होए राजी ॥४५॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

बज्जे संगलियाले संघर डोहरे ॥
डहे जु खेत जटाले हाठां जोड़ि कै ॥
नेजे बम्बलियाले दिस्सन ओरड़े ॥
चल्ले जान जटाले नावन गंग नूं ॥४६॥

दुरगा अतै दानवी सूल होईआं कंगा ॥
वाछड़ घत्ती सूर्यां विच खेत खतंगां ॥
धूह क्रिपाना तिक्खियां बढ लाहनि अंगां ॥
पहला दलां मिलन्द्यां भेड़ु पायआ नेहंगां ॥४७॥

ओरड़ फउजां आईआं बीर चड़े कंधारी ॥
सड़क म्यानो कढियां तिक्खिया तरवारी ॥
कड़क उठे रण मच्च्या वड्डे हंकारी ॥
सिर धड़ बाहां गन ले फुल जेहै बाड़ी ॥
जापे कटे बाढियां रुख चन्दनि आरी ॥४८॥

दुहा कंधारा मुह जुड़े जा स्ट्ट पई खरवार कउ ॥
तक तक कैबरि दुरगसाह तक मारे भले जुझार कउ ॥
पैदल मारे हाथियां संगि रथ गिरे असवार कउ ॥
सोहन संजा बागड़ा जनु लग्गे फु्ुल अनार कउ ॥
गु्ुसे आई कालका हथि सज्जे लै तलवार कउ ॥
एदू पारउ ओत पार हरनाकसि कई हजार कउ ॥
जिन इक्का रही कंधार कउ ॥ सद रहमत तेरे वार कउ ॥४९॥

दुहा कंधारा मुह जुड़े स्ट्ट पई जमधान कउ ॥
तद खिंग नसुंभ नचायआ डालि उपरि बरगसतान कउ ॥
फड़ी बिलन्द मंगायउसु फरमायस करि मुलतान कउ ॥
गु्ुसे आई साहमने रण अन्दरि घत्तन घान कउ ॥
अगै तेग वगायी दुरगसाह बढ सुंभन बही पलान कउ ॥
रड़की जाय कै धरत कउ बढ्ढ पाखर बढ्ढ किकान कउ ॥
बीर पलानो डिग्ग्या करि सिजदा सुंभ सुजान कउ ॥
साबास सलोने खान कउ ॥ सद साबास तेरे तान कउ ॥
तारीफां पान चबान कउ ॥
सद रहमत कैफां खान कउ ॥
सद रहमत तुरे नचान कउ ॥५०॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार

दुरगा अतै दानवी गह संघरि कत्थे ॥
ओरड़ उट्ठे सूरमे आ डाहे मत्थे ॥
कट्ट तुफंगी कैबरी दल गाह निक्कथे ॥
देखनि जंग फरेशते असमानो लत्थे ॥५१॥

दुहा कंधारां मुह जुड़े दल घुरे नगारे ॥
ओरड़ आए सूरमे सिरदार अण्यारे ॥
लै के तेगां बरछियां हथ्यार उभारे ॥
टोप पटेला पाखरां गलि संज सवारे ॥
लै के बरछी दुरगसाह बहु दानव मारे ॥
चड़े रथी गज घोड़ियी मार भुइ ते डारे ॥
जान हलवायी सीख नाल विन्न्ह वड़े उतारे ॥५२॥

दुहां कंधारां मुह जुड़े नाल धउसा भारी ॥
लई भगउती दुरगसाह वर जागन भारी ॥
लायी राजे सुंभ नो रतु पीऐ प्यारी ॥
सुंभ पलानो डिग्ग्या उपमा बीचारी ॥
डुब रतु नालहु निकली बरछी दुधारी ॥
जान रजादी उतरी पैन सूही सारी ॥५३॥

दुरगा अतै दानवी भेड़ पया सबाहीं ॥
ससत्र पजूते दुरगसाह गह सभनीं बाहीं ॥
सुंभ निसुंभ संघार्या वथ जे है साहीं ॥
फउजां राकस्यारियां वेख रोवनि धाहीं ॥
मुह कड़ूचे घाह दे छड्ड घोड़े राहीं ॥
भजदे होइ मारियन मुड़ झाकन नाहीं ॥५४॥

सुंभ निसुंभ पठायआ जम दे धाम नो ॥
इन्द्र सद्द बुलायआ राज अभिशेखनो ॥
सिर पर छत्र फिरायआ राजे इन्द्र दै ॥
चउदह लोकां छायआ जसु जगमात दा ॥
दुरगा पाठ बणायआ सभे पउड़ियां ॥
फेर न जूनी आया जिन इह गायआ ॥५५॥

इति स्री दुरगा की वार समापतं सतु सुभम सतु ॥

वाहिगुरू जी का खालसा ॥ वाहिगुरू जी की फ़तिह ॥

Chandi Di Vaar – चंडी दी वार